अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की जोड़ी से बिहार की सियासत गरमाई

prashantyadav556667766@gmail.com

बिहार की राजनीति इन दिनों बेहद रोचक मोड़ पर पहुंच चुकी है। एक तरफ बीजेपी और एनडीए चुनावी तैयारी में जुटे हैं, तो दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक ने मैदान में उतरकर चुनावी हवा को पूरी तरह बदलने का प्रयास शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा शुरू की गई वोटर अधिकार यात्रा का अंतिम चरण इस समय बिहार में चल रहा है। इस यात्रा में जब समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) नेता तेजस्वी यादव ने हिस्सा लिया तो राजनीतिक माहौल और ज्यादा गर्मा गया।

यह यात्रा अब विपक्षी एकजुटता और बीजेपी को चुनौती देने का सबसे बड़ा प्रतीक बन चुकी है। खास बात यह रही कि अखिलेश यादव ने सार्वजनिक मंच से तेजस्वी यादव को बिहार का नेता मानते हुए समर्थन दिया और दूसरी ओर तेजस्वी यादव ने खुद को विपक्षी गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया।


वोटर अधिकार यात्रा – क्या है मकसद?

राहुल गांधी ने 17 अगस्त 2025 को बिहार के सासाराम से इस यात्रा की शुरुआत की थी। यात्रा का उद्देश्य चुनाव आयोग के उस फैसले का विरोध करना है जिसमें मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) किया जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी इस प्रक्रिया के जरिए दलितों, पिछड़ों और अल्पसंख्यक वर्गों के वोट काट रही है। इसी को लेकर विपक्षी दलों ने सड़क पर उतरने का फैसला लिया।

करीब 1300 किलोमीटर की इस यात्रा ने 20 से अधिक जिलों को कवर किया है। रास्ते में हुई सभाओं और नुक्कड़ बैठकों में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। अब यह यात्रा 1 सितंबर को पटना में विशाल रैली के साथ समाप्त होगी।


अखिलेश यादव का बीजेपी और आरएसएस पर वार

यात्रा के दौरान अखिलेश यादव का अंदाज़ बेहद आक्रामक दिखा। उन्होंने चुनाव आयोग को “जुगाड़ आयोग” बताते हुए कहा कि अब यह संस्था निष्पक्ष नहीं रह गई है, बल्कि बीजेपी की मददगार बन चुकी है।

उन्होंने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर भी चुटकी ली जिसमें कहा गया था कि भारत का डीएनए 40,000 साल पुराना है। अखिलेश ने तंज कसते हुए कहा – “अवध के बाद अब मगध”, यानी जैसे उत्तर प्रदेश (अवध) में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा, अब बिहार (मगध) में जनता बीजेपी को सबक सिखाएगी।

सबसे अहम बात यह रही कि अखिलेश यादव ने मंच से तेजस्वी यादव को बिहार का असली नेता बताते हुए पूरा समर्थन दिया। इससे साफ संदेश गया कि यूपी और बिहार की सियासी ताकतें अब मिलकर बीजेपी को चुनौती देंगी।


तेजस्वी यादव का आत्मविश्वास

तेजस्वी यादव इस यात्रा में सबसे ज्यादा उत्साहित और आत्मविश्वास से भरे नजर आए। उन्होंने कहा कि बीजेपी इस यात्रा से डर गई है और एनडीए खेमे में बेचैनी साफ झलक रही है।

तेजस्वी ने खुद को विपक्षी गठबंधन का मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर दिया। हालांकि कांग्रेस ने इस पर औपचारिक सहमति नहीं दी, लेकिन अखिलेश यादव और अन्य नेताओं के समर्थन से तेजस्वी का दावा मजबूत हो गया है।

उन्होंने जनता से कहा कि – “यह लड़ाई सिर्फ चुनाव की नहीं बल्कि लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई है। हमें अपने वोट के अधिकार की रक्षा करनी होगी।”


बीजेपी और एनडीए पर बढ़ता दबाव

नीतीश कुमार के एनडीए में लौटने के बाद बीजेपी को उम्मीद थी कि बिहार में विपक्षी दल कमजोर पड़ जाएंगे। लेकिन वोटर अधिकार यात्रा ने इन उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।

यात्रा में उमड़ती भीड़ ने यह दिखा दिया कि बिहार की जनता विपक्षी गठबंधन को गंभीरता से ले रही है। बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बिहार में अब विपक्ष के पास तेजस्वी यादव जैसा युवा और लोकप्रिय चेहरा है, और अखिलेश यादव जैसे नेता का समर्थन भी मिल रहा है।


विपक्षी एकता और भविष्य की रणनीति

बिहार का यह चुनाव केवल स्थानीय मुद्दों पर नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी एकता की परीक्षा भी है। राहुल गांधी, अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव एक साथ मंच साझा कर यह संदेश दे रहे हैं कि बीजेपी को हराने के लिए पूरा विपक्ष एकजुट है।

वोटर अधिकार यात्रा ने विपक्ष को संगठनात्मक मजबूती दी है। अगर कांग्रेस, राजद और समाजवादी पार्टी मिलकर रणनीति बनाते हैं तो बिहार में मुकाबला कांटे का हो सकता है।


जनता का मूड और आने वाला चुनाव

बिहार की जनता लंबे समय से बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान है। तेजस्वी यादव युवाओं के मुद्दे उठाकर उन्हें आकर्षित कर रहे हैं, जबकि अखिलेश यादव अपने यूपी के अनुभव को बिहार में साझा कर रहे हैं। राहुल गांधी लोकतंत्र और संविधान की रक्षा का मुद्दा उठा रहे हैं।

दूसरी ओर बीजेपी विकास, स्थिरता और कानून-व्यवस्था के नाम पर जनता को लुभाने की कोशिश कर रही है। लेकिन विपक्ष की एकजुटता ने बीजेपी को रक्षात्मक स्थिति में ला दिया है।


निष्कर्ष

बिहार की सियासत इन दिनों पूरी तरह चुनावी मोड में है। अखिलेश यादव और तेजस्वी यादव की जोड़ी ने विपक्ष को नई ऊर्जा दी है। अखिलेश ने जहां बीजेपी और आरएसएस पर करारा हमला बोला, वहीं तेजस्वी ने खुद को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित कर साहसिक कदम उठाया।

आने वाले चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह विपक्षी एकजुटता कायम रह पाती है और क्या जनता बदलाव का समर्थन करती है। लेकिन इतना तय है कि बिहार का चुनावी संग्राम अब और ज्यादा रोमांचक होने वाला है।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *