भारत में चुनाव लोकतंत्र की आत्मा माने जाते हैं। हर नागरिक को यह भरोसा होना चाहिए कि मतदान निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो रहा है। हाल ही में पटना के मशहूर शिक्षा विद और यूट्यूबर खान सर ने चुनाव आयोग को लेकर कुछ ऐसी बातें कही हैं, जिसने सोशल मीडिया पर काफी चर्चा बटोरी। उनका यह बयान खासकर सीसीटीवी फुटेज को लेकर था, जो मतदान केंद्रों पर लगाई जाती है।
मामला क्या है?
खान सर का कहना था कि उन्होंने चुनाव आयोग से मतदान केंद्रों की सीसीटीवी फुटेज मांगी थी। उनका तर्क था कि इससे मतदाता और आम जनता यह समझ सकेगी कि मतदान प्रक्रिया कितनी पारदर्शी है और क्या मतदान सही तरीके से हुआ है। लेकिन चुनाव आयोग की तरफ से यह कहा गया कि ऐसी फुटेज उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। आयोग का जवाब था कि इससे लोगों की निजता (Privacy) और सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।
खान सर का व्यंग्य और बयान
इस जवाब पर खान सर ने व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा –
“चुनाव आयोग कह रहा है कि हम अपनी माताओं और बहनों का वोट डालते हुए फोटो दे सकते हैं? ये भैया वह पोलिंग बूथ था कि OYO होटल है?”
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। लोगों ने इसे अलग-अलग नज़रिए से देखा। कुछ लोगों को यह बयान मज़ेदार और सटीक लगा, वहीं कुछ ने इसे चुनाव आयोग के खिलाफ़ ज़रूरत से ज़्यादा तीखा तंज माना।
क्यों उठते हैं ऐसे सवाल?
चुनाव आयोग हमेशा से यह दावा करता रहा है कि भारत में चुनाव निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से कराए जाते हैं। इसके लिए ईवीएम मशीनों और सीसीटीवी जैसी तकनीक का इस्तेमाल भी होता है। लेकिन जब जनता या समाजसेवी पारदर्शिता की मांग करते हैं और उन्हें साफ़ जानकारी नहीं मिलती, तो सवाल उठने लाज़मी हैं। खान सर का कहना भी यही था कि यदि सबकुछ सही है तो सीसीटीवी फुटेज देने में हिचक क्यों?
जनता की प्रतिक्रिया
खान सर की लोकप्रियता के कारण उनका यह बयान देशभर के युवाओं और सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म पर चर्चा का विषय बन गया। कई लोगों ने कहा कि वह जनता के सवाल उठा रहे हैं और यह लोकतंत्र के लिए ज़रूरी है। वहीं, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मतदान केंद्र की फुटेज साझा करना गोपनीयता और सुरक्षा के लिहाज से सही नहीं है, क्योंकि इससे मतदाताओं की पहचान और उनका वोटिंग व्यवहार उजागर हो सकता है।
लोकतंत्र में पारदर्शिता की ज़रूरत
यह सच है कि लोकतंत्र तभी मज़बूत होगा, जब चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी होगी और जनता का उस पर विश्वास रहेगा। ऐसे में चुनाव आयोग को भी समय-समय पर अपने निर्णयों को स्पष्ट करना चाहिए। वहीं, समाज के प्रबुद्ध लोग जैसे खान सर, जब ऐसे मुद्दे उठाते हैं, तो इससे जनता के बीच जागरूकता बढ़ती है।
निष्कर्ष
खान सर का बयान भले ही व्यंग्यात्मक हो, लेकिन इसमें एक गंभीर संदेश छिपा है – पारदर्शिता लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है। चुनाव आयोग का कर्तव्य है कि वह जनता को यह भरोसा दिलाए कि चुनाव निष्पक्ष और बिना किसी गड़बड़ी के हो रहे हैं। वहीं जनता और शिक्षाविदों की ज़िम्मेदारी है कि वे सवाल पूछें और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और मज़बूत बनाएं।
