जॉली LLB 3 विवाद: अक्षय कुमार और अर्शद वारसी को कोर्ट का समन, क्यों फंसी फिल्म

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भारतीय सिनेमा और अदालत का रिश्ता हमेशा से दिलचस्प रहा है। कई फिल्मों में कोर्टरूम ड्रामा दिखाया जाता है ताकि लोग न्याय व्यवस्था और समाज की गहरी हकीकतों से जुड़ सकें। लेकिन जब किसी फिल्म में अदालत या जजों को मज़ाकिया ढंग से दिखाया जाए, तो यह बात कानून के रखवालों को नागवार गुजरती है।
इसी वजह से बॉलीवुड की बहुप्रतीक्षित फिल्म “जॉली LLB 3” अब कानूनी पचड़े में फंस चुकी है।

पुणे की एक अदालत ने फिल्म के मुख्य कलाकार अक्षय कुमार, अर्शद वारसी, और निर्देशक सुभाष कपूर को न्यायपालिका का अपमान करने के आरोप में समन जारी किया है। अदालत ने तीनों को 28 अक्टूबर 2025 को सुबह 11 बजे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया है।


शिकायत कैसे शुरू हुई?

यह विवाद एक याचिका से शुरू हुआ। पुणे के दो वकीलों ने अदालत में याचिका दाखिल करते हुए कहा कि फिल्म का टीज़र देखने के बाद उन्हें लगा कि इसमें जजों और वकीलों को हल्के और हास्यास्पद अंदाज़ में दिखाया गया है।

उनका आरोप है कि फिल्म में एक दृश्य में जज को “मामा” कहकर संबोधित किया गया है। यह शब्द आमतौर पर मज़ाक उड़ाने या अपमानजनक तरीके से बोला जाता है। वकीलों का कहना है कि ऐसा डायलॉग पूरी न्यायपालिका की गरिमा को चोट पहुंचाता है

इसके अलावा उनका तर्क है कि वकीलों को लड़ाकू और गैर-जिम्मेदार तरीके से दिखाया गया है, जैसे वे अदालत में गंभीर मुद्दों पर बहस करने के बजाय आपस में झगड़ रहे हों।


अदालत का फैसला

पुणे के 12वें जूनियर डिवीजन सिविल जज जे. जी. पवार ने इस शिकायत को गंभीर मानते हुए समन जारी किया। अदालत ने साफ कहा कि जब तक कलाकार और निर्देशक खुद आकर सफाई नहीं देंगे, मामला आगे बढ़ाया जाएगा।

इस आदेश के मुताबिक, अक्षय कुमार, अर्शद वारसी और सुभाष कपूर को कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से पेश होना होगा। अदालत यह देखना चाहती है कि आखिर फिल्म बनाने के पीछे उनकी मंशा क्या थी—क्या यह सिर्फ हास्य के लिए था या फिर वाकई न्यायपालिका को नीचा दिखाने की कोशिश की गई।


जॉली LLB सीरीज़ का सफर

“जॉली LLB” फ्रेंचाइज़ी का अपना अलग इतिहास है।

  • जॉली LLB (2013): इस फिल्म में अर्शद वारसी वकील की भूमिका में थे। फिल्म ने आम आदमी और सिस्टम के बीच की जद्दोजहद को हल्के-फुल्के अंदाज़ में दिखाया। यह फिल्म हिट रही और इसे नेशनल अवॉर्ड भी मिला।

  • जॉली LLB 2 (2017): इसमें अक्षय कुमार ने वकील का किरदार निभाया। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट साबित हुई और दर्शकों ने इसे खूब पसंद किया।

  • जॉली LLB 3 (2025): इस बार दोनों सितारे एक साथ कोर्टरूम में आमने-सामने होंगे। दर्शकों को यह कॉम्बिनेशन काफी रोमांचक लग रहा है। फिल्म की रिलीज़ डेट 19 सितंबर 2025 तय है।


विवाद का असर

अब सवाल यह है कि इस विवाद का फिल्म की रिलीज़ पर क्या असर पड़ेगा।

  1. पब्लिसिटी: कई बार ऐसे विवाद फिल्म को और ज्यादा चर्चा में ला देते हैं। जो लोग फिल्म के बारे में नहीं जानते, वे भी अब इसके बारे में पढ़ रहे हैं और देखना चाहेंगे।

  2. रोक लगाने की मांग: शिकायत करने वाले वकील चाहते हैं कि फिल्म पर रोक लगाई जाए। अगर कोर्ट इस पर अंतरिम आदेश दे देता है, तो फिल्म की रिलीज़ टल सकती है।

  3. निर्माताओं की परेशानी: मेकर्स को अब अदालत में सफाई देनी होगी और यह साबित करना होगा कि उनका मकसद सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन करना था, किसी का अपमान करना नहीं।


दर्शकों की राय

सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है।

  • कुछ लोग कह रहे हैं कि यह सिर्फ एक कॉमेडी फिल्म है और इसे ज्यादा गंभीरता से नहीं लेना चाहिए।

  • वहीं कुछ लोग मानते हैं कि न्यायपालिका जैसे अहम स्तंभ का मज़ाक उड़ाना गलत है, क्योंकि यह समाज में कानून के प्रति सम्मान को कम करता है।


क्या यह पहली बार हुआ है?

यह पहली बार नहीं है जब किसी फिल्म को अदालत का सामना करना पड़ा हो।

  • “जॉली LLB 2” पर भी पहले कुछ आपत्तियां उठी थीं।

  • इसके अलावा “आर्टिकल 15”, “शेरशाह” और “पीके” जैसी फिल्मों पर भी अलग-अलग वजहों से केस दर्ज हुए थे।

इससे साफ है कि भारत में फिल्मों और कोर्ट के बीच का रिश्ता काफी पुराना और संवेदनशील है।


भविष्य की राह

अब आगे की कहानी पूरी तरह कोर्ट पर निर्भर है। अगर अदालत मानती है कि फिल्म ने वाकई न्यायपालिका का अपमान किया है, तो मेकर्स को सीन काटने या डायलॉग बदलने का आदेश दिया जा सकता है।
लेकिन अगर यह साबित हो गया कि फिल्म का मकसद केवल व्यंग्य और मनोरंजन है, तो फिल्म बिना किसी बदलाव के रिलीज़ हो सकती है।

“जॉली LLB 3” फिलहाल सिर्फ एक फिल्म नहीं रह गई है, बल्कि यह असली कोर्टरूम ड्रामा बन चुकी है। अक्षय कुमार और अर्शद वारसी को अब असली अदालत में अपने किरदारों का बचाव करना होगा।

यह मामला हमें यह भी सोचने पर मजबूर करता है कि फिल्मों की क्रिएटिव फ्रीडम और समाज के महत्वपूर्ण संस्थानों का सम्मान – दोनों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

अब सबकी निगाहें 28 अक्टूबर 2025 पर टिकी हैं, जब अभिनेता और निर्देशक कोर्ट के सामने खड़े होंगे और अपनी बात रखेंगे।

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