भवांतर भरपाई योजना: हरियाणा किसानों के लिए सुरक्षा कवच

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खेती हमेशा जोखिम से जुड़ी रहती है। किसान मेहनत करता है, बीज, खाद, पानी और मेहनत पर पैसा खर्च करता है, लेकिन मंडी में भाव कभी ऊँचे तो कभी बहुत कम मिलते हैं। यही कारण है कि बहुत बार किसान को घाटा उठाना पड़ता है। इस समस्या को दूर करने के लिए हरियाणा सरकार ने एक अनोखी योजना शुरू की है, जिसका नाम है – भवांतर भरपाई योजना (Bhavantar Bharpai Yojna – BBY)

इस योजना का सीधा फायदा किसानों को मिलता है, क्योंकि जब भी मंडी में फसल का भाव लागत से कम मिलता है, तो सरकार उस नुकसान की भरपाई करती है।


योजना का उद्देश्य

  • किसानों को न्यूनतम आय की गारंटी देना।

  • बागवानी, फल और सब्ज़ी की खेती को बढ़ावा देना।

  • बाजार में भाव गिरने से किसान को नुकसान से बचाना

  • युवाओं और महिलाओं को नई फसलों और शहद उत्पादन की ओर प्रेरित करना।

  • हरियाणा को कृषि और बागवानी में अग्रणी राज्य बनाना।


किन फसलों पर लागू है योजना?

इस योजना में सिर्फ धान-गेहूं जैसी परंपरागत फसलें नहीं, बल्कि बागवानी और सब्जियों पर ज़्यादा ध्यान दिया गया है।

  • फल: आम, केला, अमरूद, संतरा, अनार

  • सब्ज़ियाँ: प्याज, टमाटर, आलू, मटर, गाजर, फूलगोभी आदि

  • मसाले: हल्दी और धनिया

हाल ही में मुख्यमंत्री ने शहद (Honey) को भी योजना में शामिल किया है। इससे मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा।


पंजीकरण कैसे करें?

इस योजना का लाभ पाने के लिए किसान को अपनी फसल “मेरी फसल मेरा ब्यौरा” (MFMB) पोर्टल पर दर्ज करनी होती है।

स्टेप-बाय-स्टेप प्रोसेस:

  1. ब्राउज़र में जाएँ: fasal.haryana.gov.in

  2. किसान पंजीकरण (Farmer Registration) पर क्लिक करें।

  3. मोबाइल नंबर डालकर OTP से लॉगिन करें।

  4. आधार या परिवार पहचान पत्र (PPP) से जानकारी कन्फ़र्म करें।

  5. अपनी ज़मीन का विवरण (खसरा/जमाबंदी) दर्ज करें।

  6. फसल का नाम, क्षेत्रफल और सीज़न (रबी/खरीफ) चुनें।

  7. सेव/सबमिट करके रसीद डाउनलोड करें।


योजना से पैसा कैसे मिलता है?

जब किसान मंडी में फसल बेचता है:

  • मंडी में उसे गेट पास और J-फॉर्म दिया जाता है।

  • सरकार हर फसल का सुरक्षित भाव (Protected Price) तय करती है।

  • मंडी भाव और सुरक्षित भाव का अंतर = किसान को मिलने वाली भरपाई राशि।

उदाहरण:
यदि प्याज की लागत ₹1,500 प्रति क्विंटल है, और मंडी में किसान को ₹1,200 मिले, तो ₹300 प्रति क्विंटल सरकार किसान को सीधे बैंक खाते में देगी।


हाल की नई घोषणा – शहद उत्पादन को बढ़ावा

2025 में हरियाणा सरकार ने घोषणा की कि शहद (Honey) को भी इस योजना में शामिल किया जाएगा।

  • कुरुक्षेत्र में हनी सेल्स व स्टोरेज सेंटर बनाया जाएगा।

  • ₹20 करोड़ की लागत से क्वालिटी कंट्रोल लैब तैयार होगी।

  • सरकार का लक्ष्य है कि 2030 तक 7,750 नए मधुमक्खी पालक बनाए जाएँ और 15,500 मीट्रिक टन शहद का उत्पादन हो।

  • किसानों को शहद पालन के उपकरणों पर 85% सब्सिडी दी जा रही है।

इससे किसानों की आय बढ़ेगी और हरियाणा शहद उत्पादन का हब बन सकेगा।


किसानों को लाभ

  1. नुकसान की भरपाई: मंडी में भाव गिरने पर भी किसान सुरक्षित रहेगा।

  2. स्थिर आय: किसान निश्चिंत होकर फल-सब्जी व शहद की खेती कर सकता है।

  3. नई फसल अपनाने का मौका: पारंपरिक खेती छोड़कर किसान नई फसलें उगा सकता है।

  4. स्टार्टअप को बढ़ावा: शहद से जुड़े उत्पाद (हनी चॉकलेट, स्किन केयर, हर्बल ड्रिंक) बनाकर ब्रांडिंग कर सकते हैं।

  5. निर्यात में बढ़त: क्वालिटी लैब से शहद का एक्सपोर्ट आसान होगा।


चुनौतियाँ

  • कई किसानों को अभी तक इस योजना की पूरी जानकारी नहीं है।

  • कभी-कभी भुगतान में देरी हो जाती है।

  • छोटे किसान पंजीकरण प्रक्रिया से घबराते हैं।


समाधान

  • सरकार को गाँव-गाँव तक जागरूकता अभियान चलाना चाहिए।

  • पंजीकरण प्रक्रिया और सरल बनाई जाए।

  • किसानों को समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए।

भवांतर भरपाई योजना हरियाणा के किसानों के लिए सुरक्षा कवच है। यह योजना किसानों को मंडी के उतार-चढ़ाव से बचाती है और उन्हें स्थिर आय देती है। अब जब शहद को भी इस योजना में शामिल कर लिया गया है, तो इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि हरियाणा शहद उत्पादन में पूरे देश में पहचान बनाएगा।

अगर सरकार समय पर भुगतान और जागरूकता सुनिश्चित करे तो यह योजना किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो सकती है।

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